CBSE BOARD CLASS IX AND X | UNSEEN PASSAGE PRACTICE 2026
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए :1. भारतीय चिंतन में स्वास्थ्य का अर्थ 'स्व' में स्थित होता है। दूसरे शब्दों में एक आत्मस्थ व्यक्ति को स्वस्थ कहा जा सकता है। जीवन का आनंद लेने के लिए स्वस्थ रहने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य व्यक्ति के व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण है। समाज का एक उत्पादक सदस्य होने के नाते हमें जागरूक और शरीर से क्रियाशील होने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य मनोविज्ञान में वे मनोवैज्ञानिक कारक आते हैं जो स्वास्थ्य को बनाए रखने और उन्नत करने में सहायक होते हैं। यह उन कारकों की भी खोज करता है जो रोग की स्थिति पैदा करते हैं। हमारी जीवन शैली और सोचने एवं व्यवहार करने के तरीके लोगों के स्वास्थ्य स्तर में योगदान करते हैं। व्यायाम, पौष्टिक भोजन लेने और धूम्रपान जैसे दुर्व्यसनों में परिवर्तन से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है।
स्वास्थ्य शारीरिक और मानसिक कुशलक्षेम की अवस्था को कहते हैं। यह एक सकारात्मक अवस्था है। लोगों के व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन में स्वास्थ्य का केन्द्रीय स्थान है। आज की दुनिया में लोगों के गुणात्मक जीवन को चारों ओर से चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जिसका परिणाम लोगों का गिरता स्वास्थ्य है। एक ओर बाहरी पर्यावरण बड़ी तेजी से बदल रहा है। इससे अनेक पर्यावरणीय तनावों से सफलतापूर्वक निपटने की आवश्यकता है। सामाजिक संरचना में आए बदलाव जैसे परिवार और अन्य सामाजिक संस्थाओं का विघटन, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्तावादी संस्कृति द्वंद्व और असहयोग को बढ़ावा प्रदान कर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
(i) गद्यांश के अनुसार व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण है :
(A) धन
(B) संघर्ष
(C) स्वास्थ्य
(D) परिश्रम
(ii) 'समाज का उत्पादक सदस्य होने से' क्या अभिप्राय है ?
(A) समाज के विकास में योगदान देने वाला सक्रिय नागरिक
(B) कल-कारखानों में काम करने वाला मेहनती श्रमिक
(C) खेत-खलिहानों में काम करने वाला परिश्रमी किसान
(D) देश के विकास में योगदान देने वाला चिंतनशील वैज्ञानिक
(iii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर
लिखिए :
कथन :उत्तम स्वास्थ्य व्यक्ति के व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन के लिए आवश्यक है।
कारण :मन की जागरूकता और शरीर की क्रियाशीलता स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।
विकल्प :
(A) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
(B) कथन और कारण दोनों सही हैं।
(C) कथन ग़लत है, लेकिन कारण सही है।
(D) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
(iv)स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने वाले नकारात्मक कारकों का उल्लेख कीजिए।
( v)स्वास्थ्य किसे कहते हैं? शरीर को स्वस्थ कैसे रखा जा सकता है ?
2. गाँधीजी ने संसार को जो संदेश दिया था, वह सर्वोदय का संदेश था। उस संदेश की जितनी पहले आवश्यकता थी, उतनी ही आज भी है। गाँधीजी ने अपने जीवन काल में न केवल वाणी और लेखनी द्वारा, बल्कि अपने आचरण द्वारा भी उस महान संदेश का प्रचार किया था।
गाँधीजी ने इस पर खूब जोर दिया था कि किसी अच्छे उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अशुद्ध साधनों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने हमें सिखाया था कि अशुद्ध साधनों द्वारा उत्तम उद्देश्य हासिल नहीं किया जा सकता। यही कारण था कि उन्होंने देश की स्वतंत्रता के श्रेष्ठ लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हिंसात्मक और आतंकवादी कार्रवाइयों का त्याग करने और सत्य तथा अहिंसा का मार्ग अपनाने की सलाह दी है। इसका परिणाम हम अपनी आँखों से देख चुके हैं। व्यवहार में यह रास्ता ज्यादा सीधा और सरल साबित हुआ। कम-से-कम हानि उठाकर हमने अपनी स्वतंत्रता हासिल की और जो कल तक हमारे विरोधी थे, वही हमारे मित्र बन गए हैं। इसके विपरीत यूरोप के पिछले दो महायुद्धों के उदाहरण भी हमारे सामने हैं। इन महायुद्धों में जन-धन का भयंकर विनाश हुआ, वह तो हुआ ही; उन नैतिक मूल्यों का भी ह्रास हो गया, जिनके कारण मनुष्य मनुष्य कहलाने का अधिकारी होता है। वे समस्याएँ आज भी बनी हुई हैं जिन्हें हल करने के लिए महायुद्ध लड़े गए थे। अतः सर्वोदय सम्मेलन में साधनों की शुद्धता पर जो बल दिया गया है, वह सर्वथा उचित है।
(i) 'गाँधीजी ने अपने आचरण द्वारा भी उस महान संदेश का प्रचार किया था।' पंक्ति में किस महान संदेश की ओर संकेत किया गया है ?
(A) सत्य और अहिंसा का संदेश
(B) सर्वोदय का संदेश
(C) शुभ आचरण का संदेश
(D) नैतिक मूल्यों का संदेश
(ii) 'गाँधीजी के भौतिक रूप से हमारे बीच उपस्थित न रहने' से क्या अभिप्राय है ? -
(A) आत्मिक रूप से उपस्थित न होना
(B) सैद्धांतिक रूप से उपस्थित न होना
(C) प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित न होना
(D) मानसिक रूप में उपस्थित न होना
(iii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन :सर्वोदय के संदेश की दुनिया को जितनी आवश्यकता पहले थी, उतनी ही आवश्यकता आज भी है।
कारण :समाज में विद्यमान समस्याओं के मूल रूप में पहले से अब तक विशेष अंतर नहीं आया है।
विकल्प :
(A)कथन ग़लत है, परन्तु कारण सही है।
(B)कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
(C)कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
(D)कथन सही है, परन्तु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iv) देश की स्वतंत्रता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गाँधीजी ने किस मार्ग को अपनाने की सलाह दी और क्यों ?
(v) स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए गाँधीजी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने के क्या परिणाम निकले ?
उत्तर अनुच्छेद संख्या 1 | ANSWER PASSAGE NO.1
(i) गद्यांश के अनुसार व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण है :
(C) स्वास्थ्य
(ii) ‘समाज का उत्पादक सदस्य होने से’ अभिप्राय है :
(A) समाज के विकास में योगदान देने वाला सक्रिय नागरिक
(iii) सही विकल्प है :
(B) कथन और कारण दोनों सही हैं।
(iv) स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने वाले नकारात्मक कारक हैं :
- बदलता हुआ बाहरी पर्यावरण और पर्यावरणीय तनाव
- सामाजिक संरचना में बदलाव, जैसे परिवार और सामाजिक संस्थाओं का विघटन
- बढ़ती प्रतिस्पर्धा
- उपभोक्तावादी संस्कृति
- द्वंद्व और असहयोग की प्रवृत्ति
- अस्वस्थ जीवनशैली और दुर्व्यसन (जैसे धूम्रपान)
(v) स्वास्थ्य शारीरिक और मानसिक कुशलक्षेम की अवस्था है। यह केवल रोग की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक सकारात्मक और संतुलित स्थिति है।
शरीर को स्वस्थ रखने के उपाय :
- नियमित व्यायाम करना
- पौष्टिक और संतुलित भोजन लेना
- धूम्रपान एवं अन्य दुर्व्यसनों से बचना
- सकारात्मक सोच और स्वस्थ व्यवहार अपनाना
- मानसिक जागरूकता और शरीर की क्रियाशीलता बनाए रखना
उत्तर अनुच्छेद संख्या 2 | ANSWER PASSAGE NO. 2
(i) पंक्ति में जिस महान संदेश की ओर संकेत किया गया है, वह है :
(B) सर्वोदय का संदेश
(ii) ‘गाँधीजी के भौतिक रूप से हमारे बीच उपस्थित न रहने’ का अभिप्राय है :
(C) प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित न होना
(iii) सही विकल्प है :
(C) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
(iv) देश की स्वतंत्रता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गाँधीजी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग को अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने हिंसात्मक और आतंकवादी कार्रवाइयों का त्याग करने को कहा, क्योंकि उनका मानना था कि अशुद्ध साधनों से उत्तम उद्देश्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। सत्य और अहिंसा के साधन नैतिक, प्रभावी और कम हानिकारक थे।
(v) स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए गाँधीजी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने के परिणाम इस प्रकार निकले :
- कम-से-कम जन-धन की हानि हुई
- देश को स्वतंत्रता प्राप्त हुई
- शत्रु देशों के लोग भी मित्र बन गए
- नैतिक मूल्यों की रक्षा हुई
- समाज में शांति और सद्भाव का वातावरण बना
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