CBSE Class 10 Hindi Chapter 9 “Diary Ka Ek Panna” – Detailed Summary, Line-wise Explanation and Difficult Word Meanings
पाठ : डायरी का एक पन्ना | लेखक : सीताराम सेकसरिया | पुस्तक : स्पर्श भाग-2
पाठ का परिचय (Introduction – Exam Ready)
“डायरी का एक पन्ना” स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक पाठ है। इसके लेखक सीताराम सेकसरिया हैं, जो स्वयं स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले व्यक्ति थे।यह पाठ लेखक की निजी डायरी का अंश है, जिसमें उन्होंने 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता (कोलकाता) में मनाए गए स्वतंत्रता दिवस का सजीव और यथार्थ वर्णन किया है।
यह रचना केवल घटनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि उस समय के जन-आंदोलन, महिलाओं की भागीदारी, अंग्रेज़ी शासन की क्रूरता और भारतीय जनता के अदम्य साहस को भी उजागर करती है।
महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Exam Oriented)
- सत्याग्रह – सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर किया गया आंदोलन
- प्रचार – किसी विचार को फैलाने का कार्य
- लाठीचार्ज – पुलिस द्वारा लाठियों से हमला
- जुलूस – लोगों का समूह जो किसी उद्देश्य से साथ चलता है
- स्वयंसेवक – स्वेच्छा से सेवा करने वाला व्यक्ति
- गिरफ्तार – बंदी बनाया जाना
- प्रचंड – अत्यंत तीव्र / शक्तिशाली
- कलंक – बदनामी
- कुर्बानी – बलिदान
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Very Important)
- महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए सत्याग्रह आंदोलन ने जनता में आज़ादी की चेतना जगाई।
- 26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
- अंग्रेज़ी शासन के विरोध के बावजूद यह परंपरा जारी रही।
- 26 जनवरी 1931 को दूसरा स्वतंत्रता दिवस मनाया गया, जिसका यह पाठ प्रत्यक्ष प्रमाण है।
- आगे चलकर 26 जनवरी 1950 को इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ।
पाठ सार (Detailed Summary – Topper Level)
इस पाठ के लेखक सीताराम सेकसरिया एक सच्चे स्वतंत्रता सेनानी थे। वे प्रतिदिन जो कुछ देखते, सुनते और अनुभव करते थे, उसे अपनी निजी डायरी में लिखते थे। प्रस्तुत पाठ उनकी डायरी का 26 जनवरी 1931 का विवरण है।
लेखक के अनुसार यह दिन कभी न भूलने वाला था। 26 जनवरी 1930 की तरह ही 1931 में भी स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियाँ बड़े पैमाने पर की गई थीं। इस दिन के प्रचार पर लगभग दो हजार रुपये खर्च किए गए थे। पूरे कलकत्ता शहर में घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा रहे थे और कई मकानों को इस प्रकार सजाया गया था मानो देश को आज़ादी मिल चुकी हो।
शहर के हर हिस्से में पुलिस का कड़ा पहरा था। स्मारक के नीचे होने वाली सभा स्थल को सुबह से ही पुलिस ने घेर लिया था, फिर भी लोगों ने जगह-जगह झंडे फहराए। कई स्थानों पर पुलिस और जनता के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
तारा सुंदरी पार्क, मारवाड़ी बालिका विद्यालय और अन्य स्थानों पर महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। स्वयंसेविकाओं ने छात्राओं को स्वतंत्रता उत्सव का महत्व समझाया। पुलिस ने कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें पूर्णोदास और पुरुषोत्तम राय शामिल थे।
चार बजकर चौबीस मिनट पर स्मारक के नीचे झंडा फहराने की घोषणा की गई थी। सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया, लेकिन पुलिस ने उस पर लाठीचार्ज कर दिया। स्वयं नेताजी पर भी लाठियाँ पड़ीं, फिर भी वे ‘वंदे मातरम्’ का नारा लगाते रहे।
महिलाओं ने अद्भुत साहस दिखाया। बड़ी संख्या में स्त्रियाँ आगे बढ़ीं, जिन पर पुलिस ने अत्याचार किए। लगभग 105 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। यह घटना कलकत्ता के इतिहास में पहली बार हुई थी जब इतनी अधिक महिलाओं को एक साथ बंदी बनाया गया।
इस आंदोलन ने यह सिद्ध कर दिया कि कलकत्ता और बंगाल भी स्वतंत्रता संग्राम में पूरी मजबूती से खड़े हैं। लोगों में नया आत्मविश्वास जागा और अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध जनभावना और तेज़ हो गई।
इस पाठ के लेखक सीताराम सेकसरिया एक सच्चे स्वतंत्रता सेनानी थे। वे प्रतिदिन जो कुछ देखते, सुनते और अनुभव करते थे, उसे अपनी निजी डायरी में लिखते थे। प्रस्तुत पाठ उनकी डायरी का 26 जनवरी 1931 का विवरण है।
लेखक के अनुसार यह दिन कभी न भूलने वाला था। 26 जनवरी 1930 की तरह ही 1931 में भी स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियाँ बड़े पैमाने पर की गई थीं। इस दिन के प्रचार पर लगभग दो हजार रुपये खर्च किए गए थे। पूरे कलकत्ता शहर में घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा रहे थे और कई मकानों को इस प्रकार सजाया गया था मानो देश को आज़ादी मिल चुकी हो।
शहर के हर हिस्से में पुलिस का कड़ा पहरा था। स्मारक के नीचे होने वाली सभा स्थल को सुबह से ही पुलिस ने घेर लिया था, फिर भी लोगों ने जगह-जगह झंडे फहराए। कई स्थानों पर पुलिस और जनता के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
तारा सुंदरी पार्क, मारवाड़ी बालिका विद्यालय और अन्य स्थानों पर महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। स्वयंसेविकाओं ने छात्राओं को स्वतंत्रता उत्सव का महत्व समझाया। पुलिस ने कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया, जिनमें पूर्णोदास और पुरुषोत्तम राय शामिल थे।
चार बजकर चौबीस मिनट पर स्मारक के नीचे झंडा फहराने की घोषणा की गई थी। सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया, लेकिन पुलिस ने उस पर लाठीचार्ज कर दिया। स्वयं नेताजी पर भी लाठियाँ पड़ीं, फिर भी वे ‘वंदे मातरम्’ का नारा लगाते रहे।
महिलाओं ने अद्भुत साहस दिखाया। बड़ी संख्या में स्त्रियाँ आगे बढ़ीं, जिन पर पुलिस ने अत्याचार किए। लगभग 105 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। यह घटना कलकत्ता के इतिहास में पहली बार हुई थी जब इतनी अधिक महिलाओं को एक साथ बंदी बनाया गया।
इस आंदोलन ने यह सिद्ध कर दिया कि कलकत्ता और बंगाल भी स्वतंत्रता संग्राम में पूरी मजबूती से खड़े हैं। लोगों में नया आत्मविश्वास जागा और अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध जनभावना और तेज़ हो गई।
प्रमुख पात्र (Important Characters)
(i) सीताराम सेकसरिया- लेखक एवं स्वतंत्रता सेनानी
- डायरी लेखक
- घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी
(ii) सुभाष चंद्र बोस
- साहसी और प्रेरणादायक नेता
- जुलूस का नेतृत्व
- लाठीचार्ज और गिरफ्तारी के बावजूद अडिग
(iii) महिला स्वयंसेविकाएँ
- आंदोलन की रीढ़
- अत्याचार सहकर भी पीछे न हटीं
- स्वतंत्रता संग्राम में नारी शक्ति का प्रतीक
पाठ का उद्देश्य / संदेश (Very Important)
इस पाठ का मुख्य उद्देश्य है:
- स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद दिलाना
- महिलाओं की भूमिका को सम्मान देना
- यह सिखाना कि एकता और साहस से बड़ा कोई हथियार नहीं
- अंग्रेज़ी शासन की क्रूर नीतियों को उजागर करना
- संदेश: जब पूरा समाज सच्चे मन से किसी लक्ष्य के लिए खड़ा हो जाता है, तो कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती।
परीक्षा की दृष्टि से उपयोगिता (Why Important for Boards)
“डायरी का एक पन्ना” हमें स्वतंत्रता संग्राम के उस जीवंत चित्र से परिचित कराता है जिसमें आम जनता, विशेषकर महिलाएँ, निर्भीक होकर अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध खड़ी नजर आती हैं। यह अध्याय प्रेरणा, साहस और देशभक्ति की भावना को मजबूत करता है।
- स्वतंत्रता संग्राम आधारित अध्याय
- महिला सशक्तिकरण पर प्रश्न बन सकते हैं
- डायरी शैली का उत्कृष्ट उदाहरण
“डायरी का एक पन्ना” हमें स्वतंत्रता संग्राम के उस जीवंत चित्र से परिचित कराता है जिसमें आम जनता, विशेषकर महिलाएँ, निर्भीक होकर अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध खड़ी नजर आती हैं। यह अध्याय प्रेरणा, साहस और देशभक्ति की भावना को मजबूत करता है।

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