Surdas Ke Pad Class 8 Summary, Explanation, NCERT Question Answers

पाठ : सूरदास के पद | कवि: सूरदास | पुस्तक: वसंत भाग–3

सूरदास के पद

‘सूरदास के पद’ – Detailed Summary, Line by Line Explanation, Important Questions & Difficult Word Meanings


  कवि परिचय : सूरदास (Very Important)  

  • नाम – सूरदास
  • जन्म – 1478 ईस्वी
  • मृत्यु – 1580 ईस्वी
  • जन्म स्थान – रुनकता (आगरा–मथुरा क्षेत्र)
  • युग – भक्ति काल
  • भाषा – ब्रज भाषा
  • भक्ति धारा – कृष्ण भक्ति शाखा
👉 सूरदास जी को कृष्ण भक्ति परंपरा का श्रेष्ठ कवि माना जाता है। उन्होंने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, वात्सल्य रस और प्रेम भाव को अत्यंत सरल व भावपूर्ण भाषा में प्रस्तुत किया है


पाठ प्रवेश : सूरदास के पद

“सूरदास के पद” में कवि ने बालक श्रीकृष्ण की नटखट लीलाओं का मनोहारी चित्रण किया है। इन पदों में वात्सल्य रस की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।
कवि ने बताया है कि किस प्रकार:

  • माता यशोदा अपने लला का पालन-पोषण करती हैं
  • गोपियाँ कृष्ण की शरारतों की शिकायत यशोदा से करती हैं
  • फिर भी वे कृष्ण से अलग नहीं हो पातीं

इन पदों में कृष्ण का बालपन, माँ से उनका प्रेम और गोपियों के साथ उनकी शरारतें अत्यंत रोचक रूप में प्रस्तुत की गई हैं।

पाठ सार : सूरदास के पद

पहले पद में बालक कृष्ण की मासूम इच्छाओं और माँ के प्रति उनके प्रेम का वर्णन है। दूसरे पद में गोपियों की शिकायतों के माध्यम से कृष्ण की नटखट लीलाओं का चित्रण किया गया है।
दोनों पदों में सूरदास जी ने बाल-कृष्ण की लीलाओं, माँ-बेटे के प्रेम और वात्सल्य रस को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है।

काव्यांश – 1

संकेत : मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी…
प्रसंग : यह पद पुस्तक “वसंत भाग–3” से लिया गया है। इसमें कवि सूरदास ने बालक श्रीकृष्ण की बाल-लीला का वर्णन किया है।

शब्दार्थ
कबहिं – कब
अजहूँ – अभी भी
बेनी – चोटी
न्हवावत – नहलाना
नागिन – साँप
काचौ – कच्चा
माखन – मक्खन
चिरजीवौ – चिरंजीवी
हरि-हलधर – कृष्ण-बलराम

  व्याख्या (Topper Level)  

इस पद में बालक कृष्ण अपनी माँ यशोदा से मासूम शिकायत करते हैं। वे पूछते हैं कि उनकी चोटी अभी तक क्यों नहीं बढ़ी। कृष्ण कहते हैं कि माँ ने उनसे कहा था कि रोज दूध पीने से उनकी चोटी बलराम भैया की तरह लंबी-मोटी हो जाएगी, परंतु ऐसा नहीं हुआ। कृष्ण यह भी कहते हैं कि माँ रोज उनके बाल धोती, संवारती है, फिर भी उनकी चोटी ज़मीन पर नागिन की तरह नहीं लोटती। वे माँ पर यह आरोप भी लगाते हैं कि वह उन्हें बार-बार दूध पिलाती है, पर मक्खन और रोटी खाने को नहीं देती, इसी कारण उनकी चोटी नहीं बढ़ रही। अंत में कवि सूरदास कृष्ण और बलराम की जोड़ी के दीर्घायु होने की कामना करते हैं। इस पद में बाल सुलभ चंचलता और वात्सल्य रस की सुंदर अभिव्यक्ति हुई है।

काव्यांश – 2

संकेत : तेरैं लाल मेरौ माखन खायौ…
प्रसंग : इस पद में सूरदास जी ने गोपियों और कृष्ण की शरारतों का वर्णन किया है।

शब्दार्थ
लाल – पुत्र
दुपहर – दोपहर
किवारि – दरवाज़ा
सखनि – मित्र
उखल – ओखली
छींका – मक्खन टाँगने की जगह
गोरस – दूध से बने पदार्थ
ढोटा – लड़का
अनोखौ – अनोखा

  व्याख्या (Topper Level)  

इस पद में एक गोपी यशोदा से शिकायत करती है कि उनका बेटा कृष्ण रोज़ उनके घर का मक्खन चुरा लेता है। जब दोपहर में घर सूना होता है, तब कृष्ण स्वयं खोजते हुए घर आ जाते हैं। वे दरवाज़ा खोलकर भीतर घुस जाते हैं और अपने मित्रों को भी दही-मक्खन खिला देते हैं। कृष्ण ओखली पर चढ़कर छीके तक पहुँच जाते हैं और मक्खन निकाल लेते हैं। खाते समय वे बहुत-सा मक्खन ज़मीन पर गिरा देते हैं, जिससे रोज़ नुकसान होता है। गोपियाँ शिकायत करती हैं, पर अंत में मानती हैं कि कृष्ण से अलग रहना संभव नहीं है। वे यशोदा से कहती हैं कि उन्होंने सचमुच एक अनोखे पुत्र को जन्म दिया है। यहाँ भी कवि ने वात्सल्य भाव को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है।

प्रश्न-अभ्यास (NCERT Important Question Answers)

प्रश्न 1. बालक कृष्ण किस लोभ के कारण दूध पीने के लिए तैयार हुए?

उत्तर: माता यशोदा ने कृष्ण को यह लोभ दिया था कि नियमित दूध पीने से उनकी चोटी बलराम भैया की तरह लंबी-मोटी हो जाएगी। इसी कारण कृष्ण दूध पीने के लिए तैयार हो गए।

प्रश्न 2. कृष्ण अपनी चोटी के विषय में क्या सोचते थे?

उत्तर: कृष्ण सोचते थे कि रोज़ दूध पीने से उनकी चोटी लंबी हो जाएगी, पर ऐसा न होने पर वे माँ से शिकायत करते थे।

प्रश्न 3. कृष्ण दूध की तुलना में कौन-सा पदार्थ अधिक पसंद करते थे?

उत्तर: कृष्ण जी दूध की तुलना में मक्खन और रोटी अधिक पसंद करते थे।

प्रश्न 4. “तैं ही पूत अनोखौ जायौ” पंक्ति में कौन-से भाव प्रकट होते हैं?

उत्तर: इस पंक्ति में गोपी का शिकायत भरा वात्सल्य भाव प्रकट होता है। वह यशोदा से कहती है कि कृष्ण सचमुच अनोखे हैं।

प्रश्न 5. मक्खन चुराते समय कृष्ण मक्खन क्यों बिखरा देते थे?

उत्तर: कृष्ण छोटे थे और छीका ऊँचा था। मक्खन निकालते समय कुछ गिर जाता था। कभी-कभी वे जान-बूझकर भी ऐसा करते थे ताकि माँ उन्हें डाँटें और उन्हें मनाने का अवसर मिले।

प्रश्न 6. आपको कौन-सा पद अधिक पसंद आया और क्यों?

उत्तर: मुझे पहला पद अधिक पसंद आया क्योंकि उसमें बालक कृष्ण की मासूम शिकायतों और माँ के प्रति प्रेम का अत्यंत सुंदर वर्णन है। इसमें वात्सल्य रस की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति है।

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